रिपोर्ट- भूपेन्द्र गुप्ता
कटेरा (झांसी)- कस्बा कटेरा में देश की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई इस दौरान दर्जन लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी इस मौके पर दर्जनों लोग मौजूद रहे।
इस समाजसेवी गोपाल प्रजापति ने कहा कि हर वर्ष तीन जनवरी को महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई जाती है। सावित्रीबाई फुले न सिर्फ पहली महिला शिक्षिका थी, बल्कि महान समाजसेविका और नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता भी थीं। उनका पूरा जीवन समाज के वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता। उनका नाम आते ही सबसे पहले शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में उनका योगदान हमारे सामने आता है। वे हमेशा महिलाओं और वंचितों की शिक्षा के लिए जोरदार तरीके से आवाज उठाती रहीं। वे अपने समय से बहुत आगे थीं और उन गलत प्रथाओं के विरोध में हमेशा मुखर रहीं। शिक्षा से समाज के सशक्तिकरण पर उनका गहरा विश्वास था। उनके पति ज्योतिराव फुले भी एक प्रसिद्ध चिंतक और लेखक थे। जब महाराष्ट्र में अकाल पड़ा तो सावित्रीबाई और महात्मा फुले ने जरूरतमंदों की मदद के लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए थे। सामाजिक न्याय का ऐसा उदाहरण विरले ही देखने को मिलता है। इस दौरान दर्जनों लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी। इस दौरान हल्काई प्रजापति, दाऊ प्रजापति, विनोद श्रीवास, संतोष, शकील खां, सुनील, महेन्द्र, नीलेश यादव, रोहित, भूपेन्द्र, सुरेन्द्र, सुनील, अंकित, देवेन्द्र, नीरज, दीपू, प्रिंस, वेदप्रकाश, शिशुपाल, विकास आदि मौजूद रहे।
सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई

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